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क्षमा याचना / अटल बिहारी वाजपेयी

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   क्षमा करो बापू! तुम हमको, बचन भंग के हम अपराधी, राजघाट को किया अपावन, मंज़िल भूले, यात्रा आधी। जयप्रकाश जी! रखो भरोसा, टूटे सपनों को जोड़ेंगे। चिताभस्म की चिंगारी से, अन्धकार के गढ़ तोड़ेंगे।

पड़ोसी से __ अटल बिहारी वाजपेयी

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एक नहीं दो नहीं करो बीसों समझौते, पर स्वतन्त्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा। अगणित बलिदानो से अर्जित यह स्वतन्त्रता, अश्रु स्वेद शोणित से सिंचित यह स्वतन्त्रता। त्याग तेज तपबल से रक्षित यह स्वतन्त्रता, दु:खी मनुजता के हित अर्पित यह स्वतन्त्रता। इसे मिटाने की साजिश करने वालों से कह दो, चिनगारी का खेल बुरा होता है । औरों के घर आग लगाने का जो सपना, वो अपने ही घर में सदा खरा होता है। अपने ही हाथों तुम अपनी कब्र ना खोदो, अपने पैरों आप कुल्हाडी नहीं चलाओ। ओ नादान पडोसी अपनी आँखे खोलो, आजादी अनमोल ना इसका मोल लगाओ। पर तुम क्या जानो आजादी क्या होती है? तुम्हे मुफ़्त में मिली न कीमत गयी चुकाई। अंग्रेजों के बल पर दो टुकडे पाये हैं, माँ को खंडित करते तुमको लाज ना आई? अमरीकी शस्त्रों से अपनी आजादी को दुनिया में कायम रख लोगे, यह मत समझो। दस बीस अरब डालर लेकर आने वाली बरबादी से तुम बच लोगे यह मत समझो। धमकी, जिहाद के नारों से, हथियारों से कश्मीर कभी हथिया लोगे यह मत समझो। हमलो से, अत्याचारों से, संहारों से भारत का शीष झुका लोगे यह मत समझो। जब तक गंगा मे धार, सिंधु मे ज्वार, अग्नि में जलन, सू...

कौरव कौन, कौन पांडव __ अटल बिहारी वाजपेयी

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कौरव कौन कौन पांडव, टेढ़ा सवाल है| दोनों ओर शकुनि का फैला कूटजाल है| धर्मराज ने छोड़ी नहींं जुए की लत है| हर पंचायत में पांचाली अपमानित है| बिना कृष्ण के आज महाभारत होना है, कोई राजा बने, रंक को तो रोना है| मौत से ठन गई / अटल बिहारी वाजपेई पंद्रह अगस्त की पुकार / अटल बिहारी वाजपेयी क़दम मिला कर चलना होगा / अटल बिहारी वाजपेयी अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी Online Shopping best and effective prizes

पंद्रह अगस्त की पुकार / अटल बिहारी वाजपेयी

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  पंद्रह अगस्त का दिन कहता:   आज़ादी अभी अधूरी है।   सपने सच होने बाकी है,   रावी की शपथ न पूरी है॥   जिनकी लाशों पर पग धर कर   आज़ादी भारत में आई,   वे अब तक हैं खानाबदोश   ग़म की काली बदली छाई॥   कलकत्ते के फुटपाथों पर   जो आँधी-पानी सहते हैं।   उनसे पूछो, पंद्रह अगस्त के   बारे में क्या कहते हैं॥   हिंदू के नाते उनका दु:ख   सुनते यदि तुम्हें लाज आती।   तो सीमा के उस पार चलो   सभ्यता जहाँ कुचली जाती॥   इंसान जहाँ बेचा जाता,   ईमान ख़रीदा जाता है।   इस्लाम सिसकियाँ भरता है,  डालर मन में मुस्काता है॥   भूखों को गोली नंगों को   हथियार पिन्हाए जाते हैं।   सूखे कंठों से जेहादी   नारे लगवाए जाते हैं॥   लाहौर, कराची, ढाका पर   मातम की है काली छाया।   पख्तूनों पर, गिलगित पर है   ग़मगीन गुलामी का साया॥   बस इसीलिए तो कहता हूँ   आज़ादी अभी अधूरी है।   कैसे उल्लास मनाऊँ मैं?   थोड़े दिन की मजबूरी है॥   दिन दूर नहीं खंडित ...